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बिहार में IPS फर्जी ट्रांसफर आदेश कांड का खुलासा, पीरो SDPO कार्यालय से रीडर गिरफ्तार

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बिहार में तीन IPS अधिकारियों के फर्जी ट्रांसफर आदेश मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। भोजपुर के पीरो SDPO कार्यालय से रीडर गिरफ्तार किया गया है।

पटना/बिहार/आलम की खबर:बिहार में तीन आईपीएस स्तर के अधिकारियों के फर्जी तबादला आदेश मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। इस पूरे मामले ने पुलिस प्रशासन में हड़कंप मचा दिया है और विभागीय स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच में सामने आया है कि यह फर्जी ट्रांसफर आदेश भोजपुर जिले के पीरो अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी कार्यालय से तैयार किया गया था।

पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए पीरो एसडीपीओ कार्यालय में तैनात रीडर को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं पीरो के एसडीपीओ कृष्ण कुमार सिंह की भूमिका को लेकर भी संदेह गहराया है। इसी कारण उन्हें तत्काल प्रभाव से पद से हटाकर पुलिस मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया है। पूरे मामले की जांच पटना साइबर थाना की टीम कर रही है और डीजीपी स्तर पर इसकी लगातार निगरानी की जा रही है।

यह मामला तब सामने आया जब मंगलवार को सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुपों में तीन आईपीएस अधिकारियों के स्थानांतरण से जुड़ा एक सरकारी जैसा दिखने वाला पत्र वायरल हो गया। इस पत्र में ग्रामीण एसपी स्तर के अधिकारियों के तबादले का उल्लेख था और इसे शुरुआत में असली आदेश माना गया। लेकिन बाद में गृह विभाग के अधिकारियों को इसकी भाषा, प्रारूप और दस्तावेज़ की संरचना पर संदेह हुआ।

इसके बाद मामला गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव तक पहुंचा जिन्होंने तुरंत डीजीपी विनय कुमार को इसकी जानकारी दी और जांच के निर्देश दिए। डीजीपी के आदेश पर पटना साइबर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई और तकनीकी जांच शुरू की गई।

साइबर टीम ने डिजिटल ट्रैकिंग के माध्यम से इस फर्जी आदेश की जांच शुरू की और यह स्पष्ट हुआ कि यह पूरा दस्तावेज भोजपुर जिले के पीरो एसडीपीओ कार्यालय से तैयार किया गया था। इसके बाद पुलिस टीम ने छापेमारी कर वहां तैनात रीडर को गिरफ्तार कर लिया।

पूछताछ के दौरान कई अहम खुलासे होने की संभावना है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या इस पूरे फर्जीवाड़े के पीछे कोई संगठित गिरोह, तकनीकी नेटवर्क या अंदरूनी साजिश शामिल है।

फिलहाल पीरो एसडीपीओ को हटाकर पुलिस मुख्यालय से अटैच कर दिया गया है और उनका अतिरिक्त प्रभार साइबर क्राइम थाना भोजपुर के डीएसपी को सौंपा गया है। पुलिस मुख्यालय ने स्पष्ट कर दिया है कि इस मामले में जो भी अधिकारी या कर्मचारी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

इस पूरे प्रकरण के बाद पुलिस मुख्यालय और गृह विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गए हैं। अब विभागीय दस्तावेजों की सुरक्षा, डिजिटल सत्यापन और साइबर निगरानी को और मजबूत करने की तैयारी की जा रही है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

साइबर थाना की टीम अब यह भी पता लगाने में जुटी है कि यह फर्जी आदेश किस कंप्यूटर सिस्टम से बनाया गया और इसे सबसे पहले किस माध्यम से वायरल किया गया। जांच तेजी से आगे बढ़ रही है और आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

सरकार और पुलिस प्रशासन ने साफ कर दिया है कि फर्जी सरकारी आदेश तैयार करना और उसे वायरल करना एक गंभीर अपराध है और इसमें शामिल किसी भी व्यक्ति को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा।

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